अनाथ

मेरी भी एक मां तो होगी

पर मैं मां का लाल नहीं,

जिस कोख ने मुझको जन्म दिया

मैंने पाया उसका प्यार नहीं,

जन्म दिया और फेंक दिया

फिर पूछा मेरा हाल नहीं,

पाकर जन्म हरामी कहलाया

मां – बाप का पाया नाम नहीं,

वह शैतान पुरुष आबारा था

जिसने मां को मजबूर किया,

मां की भी मजबूरी देखो

जिसने इतना मुझको दूर किया,

भगवान भी कोई आबारा होगा

जिसने धरती मां को मजबूर किया,

धरती मां की भी मजबूरी

जिसने बना मुझे मजदूर दिया,

जननी, धरती तनया समान हुई

वीर भोग का सामान हुई,

जैसे चाहा भोगा उसने

क्यों आया उसको काल नहीं,

मेरी भी एक मां तो होगी

पर मैं मां का लाल नहीं

हरी सिंह किन्थ

अधिकार मिल कर ही रहेगा

गर बज गया है बिगुल संघर्ष का,

तो अधिकार मिलकर ही रहेगा ।

कोई न मुझको रोक सकेगा शक्ति से डरा धमका कर,

कदम न मेरे मोड़ सकेगा झूठे स्वप्न दिखाकर ।

अब तो दम लेंगे हम अपनी मंजिल पर ही जाकर,

ली है हमने शपथ संघर्ष का बिगुल बजाकर ॥

Continue reading “अधिकार मिल कर ही रहेगा”

दर्दे-पैगाम

हुआ दर्दे-दिल तो तेरा नाम पुकारा

बैठा गम तो आया तेरा नजारा

दुख हुआ तो दिया सहारा

गाये तेरे गीत, गा रहा हूँ, गाता रहूँगा – २

सो रहा था सपनों के साये में

Continue reading “दर्दे-पैगाम”

ऐसा साहित्य लिखो

ऐसा साहित्य लिखो,

भिक्षु को देखो ।

वह जाता,

दो भाग कलेजे के करता, पछताता पथ पर जाता ।

आँत, पेट, पीठ मिलकर हैं एक,

Continue reading “ऐसा साहित्य लिखो”

चुश्की एक शराब की

देखते ही देखते क्या बात बनी कमाल की

ला गयी मस्ती मुझे चुश्की एक शराब की

गीत मैं गाने लगा

मदहोश मुझे छाने लगा

छा गयीं रंग रलियाँ, मेरे रग – रग में

Continue reading “चुश्की एक शराब की”

दुश्मन – दोस्त

ऐ दोस्त दोस्ती के काबिल न छोड़ा तैने,
वो कर दिखाया जो कभी न सोचा था मैंने
वो बचपन की सारी रातें,
जीवन की वो लंबी बातें
बातों को भी भुलाकर छोड़ा तैने
Continue reading “दुश्मन – दोस्त”

पिया का प्यार

रमणी बैठी द्वार पै, लखै पिया की वाट

वर्षा उसकी बैरिन भई, भिगो गई सब गात

रमणी पिया की याद में, बैठी मन को मारि

तन बदन की सुध नहीं, पागल भई सुकुमारि

बादल छाये गगन में, चंचल बहति बयारि

Continue reading “पिया का प्यार”

वह निश्चित ही मजदूर है

मेरे सामने खड़ा जो मौन है,

भला बताओ तो, यह कौन है ?

इसके जीवन में धूप ही धूप है, मगर उजाला नहीं

इसके जीवन में घुप्प अंधेरा है, मगर दिल कला नहीं

आँखों में इसके मोती ही मोती है, मगर गले में माला नहीं

Continue reading “वह निश्चित ही मजदूर है”