दर्दे-पैगाम

हुआ दर्दे-दिल तो तेरा नाम पुकारा

बैठा गम तो आया तेरा नजारा

दुख हुआ तो दिया सहारा

गाये तेरे गीत, गा रहा हूँ, गाता रहूँगा – २

सो रहा था सपनों के साये में

दर्द था कहीं अंजान राहों में

आ गयी उषा कहीं से मौत का पैगाम लेके

रोने लगे अरमां, किसी के दर्द के पैगाम बनके

ये दर्दे-पैगाम सबको सुनाता रहा हूँ, सुनाता रहूँगा – २

गाये तेरे गीत, गा रहा हूँ, गाता रहूँगा – २

अपना वायदा में पूरा कर ना सका

पर सपनों में तेरे रहा हूँ सदा

सपनों में साथ निभाता रहा हूँ, निभाता रहूँगा – २

गाये तेरे गीत, गा रहा हूँ, गाता रहूँगा

हरी सिंह किन्थ

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