मेरा जीवन

जीवन मेरा एक नादिया की धारा

ना कोई मंजिल ना कोई किनारा

मन है चंचल जैसे बादल

नयन मेरे जैसे काला काजल

हवा का रुख़ जिधर को होता

बादल का मुख उधर ही होता

झील सी गहरी आँखें मेरी

जैसे हो आकाश में तारा

जीवन मेरा एक नादिया की धारा

ना कोई मंजिल ना कोई किनारा

बदन मेरा जैसे नागिन कोई

चाल भी मेरी नागिन वाली

मुखड़ा मेरा चाँद का टुकड़ा

बिन्दिया की भी चमक निराली

जब भी चलती ऐसे चलती

जैसे चलता नाग हो कारा

जीवन मेरा एक नादिया की धारा

ना कोई मंजिल ना कोई किनारा

केश मेरे हैं काले ऐसे

गगन में छाये बादल जैसे

केश मैं खोलूं जब भी अपने

छायें मुख पर जैसे नींद में सपने

सारे मुख पर ऐसे फैलें

ढकलें मुख मेरा प्यारा-प्यारा

जीवन मेरा एक नादिया की धारा

ना कोई मंजिल ना कोई किनारा

कानों में कुंडल चमके ऐसे

गगन में बिजली दमके जैसे

ऋतुराज बसंत जब-जब आये

मन में ये अति प्रीत बढ़ाए

विरह में पीत वर्ण हो जाता

फूलों भरा जैसे खेत हो सारा

जीवन मेरा एक नादिया की धारा

ना कोई मंजिल ना कोई किनारा

गर्मी में तन कुम्हला जाता

जैसे सूख जाती हैं नदियाँ

प्यार को मेरा मन है तरसे

जैसे तरसे जल को नदियाँ

काश ऐसे में आते प्रियतम

और तन को करते ठंडा सारा

जीवन मेरा एक नादिया की धारा

ना कोई मंजिल ना कोई किनारा

जब-जब आती वर्षा प्यारी

खुशियां लाती जीवन में सारी

वर्षा के पानी से भरती नदियाँ

चंचल हो इठलाती नदियाँ

बलखाती इठलाती मैं भी

चलती जैसे पवन अति प्यारा

जीवन मेरा एक नादिया की धारा

ना कोई मंजिल ना कोई किनारा

कर प्रियतम की याद मैं बैठी

घर की छत पर मैं अकेली

खोया-खोया देख कर मुझको

छेड़ें आकर सारी सहेली

किसकी याद में खोई पगली

कहाँ खोया तेरा मन है प्यारा

जीवन मेरा एक नादिया की धारा

ना कोई मंजिल ना कोई किनारा

हरी सिंह किन्थ

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